“गुरु का महत्व” विषय पर संस्कारशाला का प्रेरणादायी आयोजन – लखनऊ

भारतीय परंपरा में गुरु को ज्ञान, चरित्र और जीवन दिशा देने वाला माना गया है। माता–पिता हमें जन्म देते हैं, पर गुरु हमें सही मार्ग पर चलना सिखाते हैं। इसी भावना को सशक्त करने के लिए लखनऊ में संस्कारशाला के अंतर्गत “गुरु का महत्व” विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को यह समझाना था कि गुरु केवल पढ़ाने वाले शिक्षक नहीं होते, बल्कि वे जीवन के मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और व्यक्तित्व निर्माण के आधार होते हैं। आज की पीढ़ी में अनुशासन, आदर और सीखने की ललक बढ़ाने के लिए ऐसे विषय अत्यंत आवश्यक हैं।

🌼 कार्यक्रम की प्रमुख झलकियाँ

  • गुरु–शिष्य परंपरा का परिचय

  • बड़ों और शिक्षकों के प्रति सम्मान का अभ्यास

  • प्रेरक प्रसंग और कहानियाँ

  • बच्चों द्वारा प्रश्न–उत्तर सत्र

  • गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की गतिविधि

  • “हम आदर्श विद्यार्थी बनेंगे” – शपथ

 

🎯 कार्यक्रम का उद्देश्य

  1. गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान की भावना विकसित करना।

  2. शिक्षा के साथ चरित्र निर्माण के महत्व को समझाना।

  3. बच्चों में अनुशासन, विनम्रता और आज्ञाकारिता बढ़ाना।

  4. गुरु के मार्गदर्शन से जीवन में सफलता पाने की प्रेरणा देना।


💬 वक्ताओं के विचार

वक्ताओं ने बताया –

“गुरु वह दीपक हैं जो स्वयं जलकर हमारे जीवन को प्रकाश देते हैं।”

उन्होंने बच्चों को समझाया कि गुरु की सीख को अपनाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है।

👧👦 बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन

कार्यक्रम के बाद बच्चों में उत्साह और जागरूकता दिखाई दी। कई बच्चों ने अपने शिक्षकों का सम्मान करने, नियमित अध्ययन करने और अनुशासन का पालन करने का संकल्प लिया। अभिभावकों और उपस्थित लोगों ने इस पहल की प्रशंसा की।


🌟 संस्कारों की ओर मजबूत कदम

संस्कारशाला का यह आयोजन बच्चों को केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके मन में गुरु के प्रति प्रेम और कृतज्ञता का बीज बो गया। ऐसे प्रयास समाज में नैतिक मूल्यों को पुनर्जीवित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं।

आइए, हम गुरु के बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाएं।

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