बच्चों का व्यक्तित्व केवल पढ़ाई से नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, व्यवहार और आत्मचिंतन से बनता है। इन्हीं मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से लखनऊ में एक विशेष संस्कारशाला का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य विषय था – “मैं कौन हूँ – अच्छा बच्चा”।
इस कार्यक्रम का लक्ष्य बच्चों को यह समझाना था कि एक अच्छा बच्चा वह है जो अपने माता–पिता का आदर करे, बड़ों की बात माने, सत्य बोले, मेहनत करे और समाज के प्रति जिम्मेदारी समझे। जब बच्चा स्वयं से यह प्रश्न पूछता है – “मैं कौन हूँ?” – तब उसे अपने कर्तव्यों और गुणों का एहसास होता है।
🌼 कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
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बच्चों को अच्छे और आदर्श व्यवहार के उदाहरण बताए गए।
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दैनिक जीवन में अपनाने योग्य छोटे-छोटे संस्कार सिखाए गए।
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“अच्छा बच्चा बनने” की शपथ दिलाई गई।
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प्रेरक कहानियों और गतिविधियों के माध्यम से आत्मविश्वास बढ़ाया गया।
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बच्चों ने अपने अनुभव साझा किए कि वे घर और स्कूल में कैसे बेहतर बन सकते हैं।
🎯 कार्यक्रम का उद्देश्य
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बच्चों में आत्मपहचान विकसित करना।
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अच्छे गुण – सत्य, अनुशासन, सम्मान, सहयोग – को अपनाने की प्रेरणा देना।
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परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना।
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बच्चों को सकारात्मक सोच और अच्छे आचरण की दिशा देना।
💬 वक्ताओं के प्रेरक विचार
वक्ताओं ने बताया कि –
“अच्छा बच्चा वही है, जो अपने व्यवहार से परिवार और समाज का नाम रोशन करे।”
उन्होंने बच्चों को समझाया कि हर दिन एक नया अवसर है – अपने अंदर एक बेहतर इंसान बनाने का।
👦👧 बच्चों में दिखा उत्साह
कार्यक्रम के बाद बच्चों में काफी परिवर्तन देखने को मिला। कई बच्चों ने संकल्प लिया कि वे नियमित पढ़ाई करेंगे, बड़ों का सम्मान करेंगे, झूठ नहीं बोलेंगे और दूसरों की मदद करेंगे। अभिभावकों ने भी इस तरह की संस्कारशाला को समय की जरूरत बताया।
🤝 उज्ज्वल भविष्य की ओर कदम
यह आयोजन बच्चों को सिर्फ ज्ञान देने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्हें जीवन जीने की सही दिशा दिखाने का प्रयास था। ऐसे कार्यक्रम समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
✨ आइए, हम सब मिलकर बच्चों को केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि संस्कारवान भी बनाएं।







